Short hindi stories for kids with moral values

Hindigems brings to you a collection of best short hindi stories for kids with moral values also. These stories are made and written specifically for children or kids.

Collection of short hindi stories for kids with moral values

From below you can start reading the first story.

 

1. गुल्ली का गजब पिटारा

( Short hindi stories for kids or children )

 

दादा जी आज आप अखबार नहीं पढ़ रहे हैं ? एक सुबह गुल्ली ने दादा जी से पूछा “मेरा चश्मा टूट गया है , और उसके बिना मैं पढ़ नहीं सकता ” दादाजी समझाते हुए बोले।

दादा जी की बात सुनकर गुल्ली झट से कमरे में गया और अपना भूरा बक्सा ले आया – टन – टना – टन धड़ाम – धूम गुल्ली के गजब पिटारे में से चमचमाता मैग्नीफाइंग लेंस ( Magnifying lens ) निकाला। अगर दादाजी आप इससे देखेंगे तो आपको सब कुछ बड़ा और साफ़ दिखेगा ! अरे यह तो कमाल हो गया जब तक मेरा चश्मा नहीं बनता मैं इसी से अखबार पढ़ लूंगा , दादा जी मुस्कुराते हुए बोले।

गुल्ली को तरह – तरह की चीजें इकट्ठा करने का बहुत बड़ा शौक था , चाहे वह नई चीज हो या टूटी – फूटी हो।

जैसे ताले की चाबी बोतलों का ढक्कन टूटा , चश्मा उसे जो भी चीज मिलती अपने भूरे बक्से में रख लेता।

शाम का समय था दादी , दादा जी उनकी टोपी की सिलाई कर रही थी , तभी उनके हाथ से सुई नीचे गिर गई। दादी ढूंढ – ढूंढ कर थक गई , मगर सुई नहीं मिली , तब दादी जी ने गुल्ली को आवाज लगाई और सुई ढूंढने को कहा।

गुल्ली झट से अपना पिटारा ले आया टन – टनाटन धड़ाम – धूम , इस बार गुल्ली ने बक्से में से चुंबक निकाला। उसमें लोहे की चीजें चिपक जाती है , अब मैं इसे जमीन पर घुमाऊंगा और जल्द ही आपकी सुई मिल जाएगी। गुल्ली दादी से बोला थोड़ी देर चुंबक घुमाने पर सुई मिल गई। साथ ही और बहुत सी खोई हुई चीजें भी चुंबक पर चिपक गई।

धन्यवाद गुल्ली बेटा ! तुम तो बहुत सयाने हो तुम्हारा यह छोटा भूरा बक्सा सचमुच गजब का है।

दादा – दादी ने गुल्ली के माथे को चूमते हुए बोले।

2. छाता की रोचक कहानी

This is another interesting hindi stories for class 1 to 5 students. Read carefully till end.

चित्रों में हमेशा राजा और रानी के सिर पर क्षत्र होता है।  इसलिए बारिश में छाता लेकर चलते समय मुझे ऐसा आभास होता है ,जैसे मैं खुद कोई राजकुमारी हूं। हालांकि छाता मुझे ही पकड़ना पड़ता है।

पहले छाता केवल बरसात में दिखता था , मगर अब वह किसी भी मौसम में दिख जाता है।

गर्मी में धूप से बचने के लिए भी उसका प्रयोग किया जाता है।

मेरे पिताजी हमेशा कहा करते थे कि उनके बचपन में लंबे डंडे वाला काले रंग का ही छाता होता था।

उनका इतना वजन होता था की पाठशाला पहुंचने तक हाथों में दर्द होने लगता था।

ऐसा लगता था कि छाता ढोने से बेहतर है बारिश में भीग जाना। छाता इतना बड़ा था कि , तीन से चार लोग उसके नीचे आराम से चल पाते थे।

मैंने अपने दादाजी को ऐसा एक छाता उल्टा लटकाकर चलते देखा था।

जब वे छाता खोलते तब उनकी शान किसी धनुर्धारी से कम नहीं होती थी।

बाजार में बटन वाला छाता आने से अब वह शान जाती रही।

तेज बारिश होने पर हम झट से बटन वाला छाता खोलते हैं , और वह झट से बंदूक की गोली की तरह जाकर किसी से टकरा जाता है और हमारे हाथों में बस डंडा बस जाता है।

Short hindi stories for students

आसपास के लोग ऐसे घूरने लगते हैं मानो यह दुनिया की पहली अजीबो – गरीब घटना है।

छाते के कई उपयोग होते हैं , बड़े – बूढ़े इसका सहारा लेकर चलते हैं , और अगर आपको सामने वाले से छुपना हो तो छाता मुंह के सामने ले आने से काम हो जाता है। एक बार कड़ाके की सर्दी में पड़ोस के चाचा जी सुबह-सुबह छाता लेकर बाहर जाने लगे , कारण पूछने पर बताया अरे कुत्ते पीछे पड़ जाते हैं।

भोंकते हैं हमला करते हैं , छाते से उन्हें भगा सकते हैं।

एक बार तो मैंने उन्हें चाचा जी के लिए बिस्किट का पैकेट छाते में छुपा कर रखते देखा। मुझे छाते का ऐसा उपयोग पहली बार नजर आया। पहले के जमाने का काला लंबे डंडे वाला छाता अब रंगीन हो गया।

एक फोल्ड की जगह अब तो कई फोल्ड होते हैं।

डंडे वाला छाता अब छोटा होकर लड़कियों के पर्स में आराम से समा जाता है।

लेकिन महिलाओं के छाते छोटे क्यों बनते हैं ?

अब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिला।

 

3. समझदार कौन अंदाजा लगाएं

( Moral based Short Hindi stories for kids )

 

सोनू की बहन है मीना। दोनों का खेल आंख खोलने से पहले ही शुरू हो जाता। कभी सोनू हनुमान बन जाता , तो मीना सीता।

कभी टीवी सीरियल का भीम तो कभी बलराम।

उन्हें खेलते देख उनकी मां रमा बहुत खुश होती।

एक दिन खेलते – खेलते सोनू और मीना में झगड़ा होने लगा कि दोनों में से तंदुरुस्त कौन ?

दोनों ही अपने आप को तगड़ा कह रहे थे।

सोनू ने अपना पेट बाहर निकालते हुए कहा  – “मैं मीना से ज्यादा तगड़ा हूं।

मां  मीना ने अपनी बांह दिखाकर कहा कि मुझमें है ज्यादा दम।

अब मां क्या करती ? किस को तगड़ा बोलती और किस से कमजोर ?

तभी सोनू – मीना के पिता आशीष आ गए , बच्चों की ऐसी बातें सुनकर हंसने लगे और दोनों बच्चों को गले लगा लिया।

आशीष ने रामा को बोला कि इन बच्चों में से कौन जीतेगा इसका फैसला आंगनवाड़ी दीदी करेगी।

फिर आशीष ने रमा को बताया कि दूसरे गांव में चल रहे कार्यक्रम के दौरान उसे पता चला कि बच्चों का वजन पहले तीन साल तक हर महीने और फिर पांच साल तक तीन महीने में एक बार करवाना चाहिए।

यह वजन जब बच्चे के ग्रोथ चार्ट पर चिन्हित किया जाता है , तभी बच्चे के विकास का पता चलता है।

इसलिए बच्चों के विकास की सही जानकारी के लिए आंगनवाड़ी केंद्र चलते हैं।

आंगनवाड़ी केंद्र पर आंगनवाड़ी दीदी ने सोनू और मीना का वजन किया और ग्रोथ चार्ट पर चिन्हित किया।

वजन देखकर पता चला कि मीना का विकास सही हो रहा है , परंतु सोनू कुपोषण की तरफ बढ़ चुका है।

तब आंगनवाड़ी दीदी ने रमा और आशीष को मीना के सही विकास के लिए शाबाशी दी.

और सोनू को खाने – पीने का सही खयाल रखने अथवा बीमारियों से बचने की पूरी सलाह भी दी।

दीदी ने यह भी बताया कि अभी से ही सोनू का ध्यान रखने से उसे कुपोषण के खतरे से बचाए आ जा सकता है।

रमा और आशीष ने आंगनवाड़ी दीदी से वादा किया कि वह दोनों बच्चों का ध्यान रखेंगे और नियमित रूप से वजन कराएंगे।

 

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