Hindi stories for class 1, 2, 3, 4, and 5 students with moral

Today we bring to you Hindi stories for class 1 to 5 students with moral values or naitik shiksha. These stories will be helpful in developing the root values inside kids with lots of fun.

प्रस्तुत कहानी विशेषकर नन्हे पाठकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है , जिसमें मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञान तथा नीति की शिक्षा भी निहित है। इस कहानी के संकलन में , जीवन को एक नई दिशा और लक्ष्य की ओर की ओर इंगित करने का प्रयत्न किया गया है। जिसमें पंचतंत्र की भांति तथा अपने समाज और अपने परिवार के माध्यम से प्राप्त शिक्षा को नन्हे पाठकों तक जोड़ने का प्रयास किया गया है।

आज जहां हमारे नन्हे पाठक बेहद ही कम मात्रा में होंगे जो अपने दादा – दादी अथवा संयुक्त परिवार में रह रहे होंगे। ऐसे ही पाठकों के मन – मस्तिष्क में उन सभी चेतनाओं को जागृत करने का प्रयत्न किया गया है , जो संयुक्त परिवार तथा समाज और वातावरण के माध्यम से प्राप्त होता है।

These stories are written in easy language which can be understood by anyone.

Hindi stories for class 1 to 5 students with moral values

Below you will get collection of best hindi stories for class 1 to 5 students. In very easy hindi language.

आशा है हमारे नन्हे पाठक इस लेख को पढ़कर कुछ ज्ञान हासिल कर पाएंगे , साथ ही उनका मनोरंजन भी हो सकेगा। इसी आशा के साथ कहानी आरंभ करते हैं –

नटखट की सेवा भावना

चंदन अपने दादाजी के साथ पार्क में टहलने के लिए निकला था। दादाजी के साथ घूमना उसको खूब पसंद था , इसलिए रोज शाम होते ही वह दादाजी के आगे पीछे घुमा करता था और पार्क चलने के लिए जिद किया करता था। दादा जी को भी चंदन से काफी प्रेम था , इसलिए वह चंदन की बात कभी टालते नहीं थे और चंदन को जब कोई डांटता था तो दादाजी तुरंत चंदन का बचाव करते और डांटने वालों को ही डांट लगाया करते थे।

दादा जी का प्यार पाकर चंदन भी अंदर से नटखट किंतु ईमानदार और दूसरों की मदद करने वाला लड़का बन गया था। जब दादाजी और चंदन पार्क में घूम रहे थे , तभी चंदन की नजर पार्क के कोने पर पड़ी जहां कोई वस्तु हिलती हुई नजर आई और उसके पीछे दो – तीन आवारा कुत्ते चोट पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे थे।

चंदन तुरंत अपने दादाजी के साथ वहां पहुंचा , तो दिखा एक बड़ा सा कछुआ उन कुत्तों से अपनी जान बचाने के लिए भागता जा रहा है। दादा जी ने अपने डंडे से उन कुत्तों पर दो डंडा लगाया , सभी वहां से नौ दो ग्यारह हो गए। चंदन ने कछुए को हाथ में उठाया और उसको पानी से साफ करके उसके चोट पर मलहम लगा कर पास की एक नदी में छोड़ आया।

 

उत्सव के दो प्यारे तोते

( Short Hindi stories for class 1 to 5 students )

 

उत्सव आज बेहद प्रसन्न था क्योंकि आज उसका जन्म दिवस था। ढेर सारा गिफ्ट और खाने-पीने का सामान आज उत्सव के सामने था।  किंतु ढेर सारे सामान और खाने – पीने की वस्तुओं से ज्यादा खुशी उसे इस बात की थी कि उसके पिताजी आज उसके लिए दो तोते पिंजड़े में लेकर आए थे। दोनों तोते बेहद प्यारे थे , और मीठी – मीठी आवाज में बोल रहे थे ,यही उत्सव के खुशी का कारण था।

उत्सव प्रतिदिन दोनों तोते की सेवा करता , दाना – पानी देता और घंटों बैठकर उसके करतब को देखा करता था।

यहां तक कि खाना भी उन्हीं लोगों के साथ बैठकर खाता था।

उनको उत्सव मिट्ठू कहकर बुलाया करता था।

स्कूल जाते समय वह अपनी मां को दोनों की हिफाजत करने के लिए कहकर जाता था और स्कूल से आते ही उन दोनों से मिलकर खूब खुश  हुआ करता था।

दोनों मिट्ठू , उत्सव को देखते ही खुशी से न जाने क्या-क्या बोलने लग जाते। कुछ दिनों में दोनों मिट्ठू ने उत्सव – उत्सव बोलना सीख लिया था। अब वह खाना भी मांगते तो – उत्सव खाना दे , उत्सव खाना दे इस प्रकार की आवाज करते। घर वाले भी हंसा करते थे और मजाक भी बनाया करते थे। एक दिन उत्सव स्कूल गया हुआ था तभी उसकी मां ने दोनों मिट्ठू को खाना दिया , किंतु पिंजड़े का गेट बंद करना भूल गई। अब क्या था दोनों मिट्ठू को मौका मिल गया और एक-एक करके पिंजरे से बाहर आए।

कुछ देर घर में घूमते रहे और मौका देखते ही आसमान में उड़ने लगे।

उत्सव जब स्कूल से आया तो उसने पिंजड़े में मिट्ठू को नहीं पाया। वह काफी बेचैन हुआ अपनी मां से पूछा तो मां को भी समझ में नहीं आया। किन्तु  वह मिट्ठू अब पिजड़े में नहीं आएंगे क्योंकि उन्होंने खुले में रहना स्वीकार कर लिया है।

उत्सव काफी उदास रहने लगा , उसका पढ़ने – लिखने में मन नहीं लग रहा था।

तभी दादाजी ने प्यार से बिठाकर उत्सव को समझाया कि कोई भी व्यक्ति स्वतंत्र रहना चाहता है , अगर आपको भी सोने के पिंजरे में रखा जाए तो आप भी नहीं रहेंगे।

वैसे ही मिट्ठू में भी प्राण है , उनको भी खुले में उड़ना और खाना – पानी करना पसंद है इसलिए वह उड़ गए हैं। उत्सव को अब बातें समझ में आ गई थी , वह अब खुश था कि उसके मिट्ठू अब पिंजरे में रहकर परेशान नहीं होंगे बल्कि वह खुले में अपने परिवार के साथ रहेंगे। कभी-कभी दोनों मिट्ठू उत्सव के घर के आंगन में लगे आम के पेड़ पर बैठकर उत्सव खाना दे , उत्सव खाना दे बोलते जिसको देखकर उत्सव खुश होता और मुस्कुरा कर उन दोनों के लिए पेड़ के नीचे उनका भोजन रख दिया करता था।

 

अमन की जिज्ञासा

( Best Hindi stories for class 1 to 5 students )

 

अमन को लड्डू खाना बहुत पसंद है। आज घर में पूजा हुई प्रसाद में जब लड्डू का वितरण हुआ तो अमन काफी प्रसन्न हुआ , क्योंकि लड्डू उसका प्रिय है और आज लड्डू हाथ में।

वह प्रेम से लड्डू खा रहा था , तभी एक छोटा सा टुकड़ा जमीन पर गिर गया।

अमन ने उस टुकड़े को उठाकर एक किनारे रख दिया।

कुछ देर बाद अमन देखता है ,  एक चींटी भटकते – भटकते लड्डू के पास पहुंची।

लड्डू को काफी उठाने की कोशिश करती रही , किंतु वह लड्डू उससे नहीं उठा, वह वापस लौट गई।

कुछ ही देर हुआ होगा कि वह चींटी अपनी पूरी फौज लेकर उस लड्डू के पास पहुंच गई और सब ने मिलकर उस लड्डू को सिर पर उठा लिया।

सभी चींटियां लड्डू को लेकर अपने घर की ओर दौड़ने लगी।

ऐसा देखकर अमन को आश्चर्य हुआ वह चीटियों का पीछा करते-करते एक पेड़ के नीचे पहुंचा।

जहां से एक सुरंग पेड़ के नीचे जा रही थी , सभी चीटियां लड्डू के टुकड़े को लेकर अंदर चली गई।

 

सरदार की समझदारी ने बचाई सबकी जान

( Moral based Hindi stories for class 1 to 5 students )

 

जंगल के बीच एक बरगद के पेड़ पर ढेर सारे तोते रहते थे। उनका सरदार बेहद ही समझदार और तेज दिमाग का था। वह अपने सभी साथियों को सतर्क रहने की नसीहत दिया करता था। एक दिन जब सभी तोते भोजन की तलाश में पेड़ से दूर गए हुए थे , तभी उनका सरदार थकावट के कारण वहीं वृक्ष के ऊपर बैठा था। तीन शिकारी उस पेड़ के नीचे आए और बात करने लगे यहां खूब सारे तोते रहते हैं , सबको पकड़ कर खूब पैसे कमाएंगे।

शिकारियों ने योजना बनाई और सभी डालों पर गोंद लगा दिया , जिसके कारण सभी तोते पकड़ जाए।

सरदार ने झटपट अपने साथियों को इसकी जानकारी देने के लिए उड़ान भरी , किंतु सभी तोते एक साथ नहीं थे। इसलिए सरदार सभी को सतर्क नहीं कर पाए। जितने तोते को जानकारी मिली वह सब सतर्क थे , और जिनको जानकारी नहीं मिली वह सब पेड़ पर जाकर बैठ गए।

डाल पर गोंद लगा होने के कारन उनके पैर उसी डाल पर चिपक गए।

अब सरदार ने अपने साथियों को फंसा हुआ देखकर स्वयं भी उस पेड़ पर जा बैठा और सभी को आदेश दिया -” शिकारी जब तक सभी तोते को पेड़ से हटाता नहीं है , तब तक सभी मरे हुए होने का स्वांग करते रहेंगे।

जैसे ही मैं बोलूंगा सभी एक साथ उड़ जाएंगे। उससे पहले कोई नहीं उड़ेगा।

ऐसा ही हुआ।

शिकारियों ने सभी तोते को बारी-बारी उठाकर देखा और नीचे डालते रहे , उन्हें मालूम चल रहा था की सभी तोते मरे हुए हैं।

अंत में जब आखरी एक तोते को भी उन्होंने नीचे डाला

तभी सरदार ने कहा – ” सभी उड़ो ” सभी तोते एक साथ आसमान की ओर उड़ गए। शिकारी अपना माथा पकड़े वहीं बैठे रहे।

 

Final words

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